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राजस्थान: धरती के नीचे खत्म हो रहा है पानी का खजाना, तरनाक स्तर पर पहुंचा भूजल दोहन 

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राजस्थान  Published by: Shikha Pandey , Date: 23/07/2026 12:57:14 pm Share:
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  • Date:
  • 23/07/2026 12:57:14 pm
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राजस्थान: राजस्थान में लगातार गिरता भूजल स्तर अब चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में प्रदेश में भूजल दोहन की स्थिति बेहद गंभीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में भूजल निकासी का स्तर 147.11 प्रतिशत तक पहुंच गया है, यानी राज्य में जितना पानी प्राकृतिक रूप से जमीन में वापस पहुंच रहा है, उससे कहीं ज्यादा मात्रा में भूजल बाहर निकाला जा रहा है। जानिए पूरी खबर। 

 भूजल दोहन के मामले में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच राजस्थान

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य सरकारों की ओर से जारी संयुक्त वार्षिक भूजल संसाधन आकलन-2025 में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार भूजल दोहन के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में पंजाब 156.36 प्रतिशत भूजल दोहन के साथ पहले नंबर पर है, जबकि हरियाणा 136.75 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। राजस्थान के जिलों की बात करें तो सबसे चिंताजनक स्थिति अलवर जिले की सामने आई है। यहां भूजल दोहन का स्तर करीब 190 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यानी जिले में जमीन के अंदर मौजूद जल भंडार पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा जैसलमेर में भूजल दोहन सबसे ज्यादा 321.84 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो देश में किसी भी जिले की सबसे गंभीर स्थिति बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार झुंझुनूं, सीकर और चूरू जैसे जिलों में भी भूजल दोहन 200 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुका है। वहीं नागौर में यह आंकड़ा 180 प्रतिशत से अधिक और जयपुर में 170 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज किया गया है। दौसा जिले के कई ब्लॉक भी अति दोहित और गंभीर श्रेणी में शामिल किए गए हैं।

देशभर में भी बढ़ रहा जल संकट

भूजल आकलन-2025 के अनुसार देश की 7,262 मूल्यांकन इकाइयों में से 730 इकाइयां अति दोहित श्रेणी में पाई गई हैं। वहीं 201 इकाइयां गंभीर, 758 इकाइयां अर्ध-गंभीर और 127 इकाइयां लवणीय श्रेणी में शामिल की गई हैं। हालांकि वर्ष 2017 के मुकाबले देश में कुल भूजल दोहन का स्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन कई राज्यों और जिलों में हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में खेती, पेयजल और उद्योगों के लिए भूजल पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। कम बारिश, बढ़ती आबादी और जल संरक्षण की कमी के कारण जमीन के अंदर का पानी तेजी से कम हो रहा है। जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते वर्षा जल संचयन, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन और भूजल पुनर्भरण जैसी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में कई इलाकों में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। राजस्थान में पानी का संकट अब सिर्फ भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान की बड़ी चुनौती बन चुका है। जमीन के नीचे घटता जल स्तर आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
 


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