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हरियाणा: साइकिल यात्रा का चंडीगढ़ में हुआ समापन, मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र
- Photo by : social media
विस्तार
हरियाणा: फरीदाबाद सिविल अस्पताल से 1 जून को शुरू हुई हरियाणा प्रदेश साइकिल यात्रा और जिला नागरिक अस्पतालों के बाहर आयोजित सांकेतिक धरना प्रदर्शन का समापन मंगलवार को चंडीगढ़ में हुआ। समापन अवसर पर रैफरमुक्त संघर्ष समिति के संयोजक सतीश चोपड़ा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर सरकारी अस्पतालों की जमीनी स्थिति से अवगत कराया और दो मांग पत्र सौंपे। मुख्यमंत्री ने दोनों मांग पत्र संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेज दिए हैं। पहले मांग पत्र में हरियाणा में मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट (PG) और सुपर-स्पेशियलिटी सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई। समिति के अनुसार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में केवल 422 सरकारी PG MD/MS सीटें हैं, जबकि दिल्ली में 1,398 और राजस्थान में 2,006 सीटें उपलब्ध हैं। हरियाणा में कुल PG सीटों का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा निजी कॉलेजों के पास है। समिति ने बताया कि DM/MCh सुपर-स्पेशियलिटी सीटों की स्थिति भी चिंताजनक है। दिल्ली में 400 से अधिक और राजस्थान में 250 से ज्यादा सरकारी सीटों के मुकाबले हरियाणा में कुल 40 सीटें हैं, जिनमें केवल 24 सरकारी हैं। मांग की गई कि PGIMS रोहतक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल, शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज नूंह और भगत फूल सिंह मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां में PG सीटें बढ़ाई जाएं तथा सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर-स्पेशियलिटी विभाग शुरू किए जाएं। दूसरे मांग पत्र में लावारिस, बीमार और मंदबुद्धि मरीजों के लिए सरकारी शेल्टर होम स्थापित करने की मांग उठाई गई। सतीश चोपड़ा ने बताया कि वे वर्षों से सड़क पर मिले लावारिस और बीमार लोगों को सिविल अस्पताल फरीदाबाद में भर्ती करवाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में ऐसे मरीजों के पुनर्वास के लिए कोई सरकारी शेल्टर उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण अस्पताल अक्सर उन्हें दिल्ली रेफर कर देते हैं। उन्होंने विशेष रूप से लावारिस मंदबुद्धि महिलाओं की सुरक्षा को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि उनके साथ शारीरिक शोषण जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। समिति ने मांग की कि फरीदाबाद सहित पूरे हरियाणा में ऐसे जरूरतमंद लोगों के लिए सरकारी शेल्टर होम बनाए जाएं।रैफरमुक्त संघर्ष समिति ने उम्मीद जताई कि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।