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झारखण्ड: मैदान नहीं मिला तो टूट जाएंगे सपने, खेल सुविधाओं के लिए ग्रामीण युवाओं का फूटा गुस्सा

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झारखण्ड  Published by: Arun Kumar Ravi , Date: 01/07/2026 02:09:10 pm Share:
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  • 01/07/2026 02:09:10 pm
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झारखण्ड: प्रखंड के सुदूरवर्ती मुरुमदाग गांव में खेल मैदान की कमी के कारण ग्रामीण युवाओं की खेल प्रतिभाएं प्रभावित हो रही हैं। क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में रुचि रखने वाले युवा लंबे समय से अभ्यास के लिए उचित मैदान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। इससे गांव के खिलाड़ियों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, जिनमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता है। बावजूद इसके, नियमित अभ्यास के लिए उपयुक्त मैदान और सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। मजबूरी में युवा सड़क, खेत और खाली पड़ी जगहों पर अभ्यास करते हैं, जो न केवल असुरक्षित है बल्कि पेशेवर तैयारी के लिहाज से भी पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

युवाओं और ग्रामीणों ने गांव स्थित देपहरी मैदान को सरकारी स्तर पर खेल मैदान के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि इस मैदान को समतल कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो आसपास के गांवों के खिलाड़ियों को भी अभ्यास का बेहतर अवसर मिल सकेगा। खिलाड़ियों का मानना है कि आज खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक करियर का भी एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में न तो कोई स्थायी खेल मैदान है और न ही खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण, खेल सामग्री या प्रशिक्षित कोच की व्यवस्था है। ऐसे में युवा सीमित संसाधनों के बीच अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार मौखिक और लिखित रूप से मांग करने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि गांव में सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद उसे खेल मैदान के रूप में विकसित नहीं किया गया है। ग्रामीणों और युवाओं ने सरकार तथा जिला प्रशासन से देपहरी मैदान को जल्द खेल मैदान घोषित करने, मिनी स्टेडियम निर्माण, खेल सामग्री उपलब्ध कराने और नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं अवसरों के अभाव में दम तोड़ देंगी।
 

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