-
☰
उत्तर प्रदेश: पक्का मकान नहीं, साड़ियों की आड़ में गुजर रही जिंदगी, आवास योजना पर उठे सवाल
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: कोरांव प्रयागराज सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित तमाम योजनाएं चला रही है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: कोरांव प्रयागराज सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित तमाम योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कोरांव तहसील क्षेत्र के खजूरी खुर्द गांव की तस्वीर सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। गांव निवासी विनोद वर्मा का पुश्तैनी कच्चा मकान पिछले वर्ष बारिश के दौरान गिर गया था। मकान गिरने के बाद परिवार के सामने सिर छिपाने तक का संकट खड़ा हो गया। पीड़ित का आरोप है कि उसने ग्राम प्रधान को मामले की जानकारी दी और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन भी किया, लेकिन उसका नाम पात्रता सूची से हटा दिया गया और उसे अपात्र घोषित कर दिया गया। दोनों किडनियों में पथरी, पत्नी की मौत विनोद वर्मा की जिंदगी पहले से ही मुश्किलों से घिरी हुई है। बताया गया कि उनकी दोनों किडनियों में पथरी है और ऑपरेशन होना बाकी है। पत्नी का निधन हो चुका है। परिवार में दो छोटे बच्चे और वृद्ध मां हैं। पिता की भी काफी समय पहले मौत हो चुकी है। परिवार के पास खेती की जमीन भी नहीं है। बीमारी और आर्थिक तंगी के चलते परिवार का गुजारा बेहद मुश्किल से हो रहा है। पीड़ित के मुताबिक फिलहाल सरकारी राशन से मिलने वाले अनाज के सहारे परिवार किसी तरह जीवन काट रहा है। बारिश आई तो साड़ी बनी घर की दीवार सबसे मार्मिक तस्वीर उस समय सामने आती है जब बारिश के बीच यह परिवार अपने बच्चों के साथ साड़ियों की आड़ बनाकर रहने को मजबूर है। बारिश से बचाने के लिए घर में रखा कपड़ा और बिस्तर भी दूसरे के घर में सुरक्षित रखना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन परिवारों के पास रहने के लिए पक्की छत तक नहीं है, यदि उन्हें भी सरकारी आवास योजना में पात्र नहीं माना जाएगा तो आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ किसे मिलेगा? बच्चों की पढ़ाई पर भी मंडराया संकट विनोद वर्मा के दोनों बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। घर न होने और लगातार बारिश के कारण परिवार की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। आर्थिक संकट के बीच बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी संकट मंडराने लगा है। पीड़ित परिवार ने सक्षम अधिकारियों से मामले की जांच कराकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता की दोबारा जांच कराने और जल्द से जल्द आवास उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। अधिकारियों से जांच की मांग ग्रामीणों का कहना है कि यदि विनोद वर्मा वास्तव में आवास योजना के पात्र हैं तो उनका नाम सूची से किस आधार पर हटाया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अब देखना यह है कि कोरांव प्रशासन और संबंधित विभाग इस बेघर परिवार की पीड़ा पर कब संज्ञान लेते हैं और कब उसके सिर पर पक्की छत उपलब्ध होती है।