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उत्तर प्रदेश: कागजों में इलाज का दावा और हकीकत में ताले बंद पड़े अस्पतालों पर उठे बड़े सवाल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Indresh Kumar Pandey , Date: 03/07/2026 02:05:11 pm Share:
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  • 03/07/2026 02:05:11 pm
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उत्तर प्रदेश: सोनभद्र विकास खंड बभनी के ग्राम पंचायत चैनपुर और विकास खंड म्योरपुर के सागोबांध स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों अस्पताल लंबे समय से बंद पड़े हैं, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति दर्ज की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश लोगों को यह तक जानकारी नहीं है कि उनके गांव में सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं। अस्पतालों के लगातार बंद रहने से मरीजों को निजी क्लीनिकों या दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि ये चिकित्सालय नियमित रूप से संचालित हों और डॉक्टर समय पर उपलब्ध रहें, तो आसपास के कई गांवों के हजारों लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह सुविधा केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पतालों पर अक्सर ताला लटका रहता है, तो डॉक्टरों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आयुष विभाग से मांग की है कि दोनों चिकित्सालयों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से लोगों तक पहुंच सके। इस मामले में जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी ने कहा कि केंद्र पर डॉक्टर, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति है। शिकायतों की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।