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झारखण्ड: आज़ादी के 75 साल बाद भी सड़क से वंचित रविदास टोला, बरसात में बनती है ‘नरक जैसी राह’

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झारखण्ड  Published by: Arun Kumar Ravi , Date: 03/07/2026 01:54:17 pm Share:
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  • 03/07/2026 01:54:17 pm
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झारखण्ड: छतरपुर विकास के दावों और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की सरकारी योजनाओं के बावजूद रुदवा गांव का रविदास टोला आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। वर्षों से जर्जर पड़ी इस सड़क की स्थिति बारिश के मौसम में और भी भयावह हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क लंबे समय से बदहाल स्थिति में है और अब तक इसका निर्माण नहीं कराया गया है। बरसात के दिनों में सड़क पर गहरे गड्ढे, कीचड़ और जलजमाव के कारण आवागमन बेहद कठिन हो जाता है। पैदल चलना तक जोखिम भरा हो जाता है, जबकि वाहनों का आना-जाना लगभग बंद सा हो जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवेदन देकर अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। हर चुनाव में सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है, जिन्हें रोज इसी रास्ते से स्कूल जाना पड़ता है। बारिश में सड़क पर भरे पानी और कीचड़ के कारण कई बार बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं। वहीं अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि बाजार, अस्पताल और आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इलाज के लिए मुख्य सड़क तक ले जाने में खासी परेशानी होती है, क्योंकि एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। किसानों ने बताया कि खराब सड़क के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। खाद, बीज और उपज को बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च और समय लग रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल्द सर्वे कराकर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।