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उत्तर प्रदेश: दादी रतन मोहिनी की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ghanshyam Das , Date: 09/04/2026 10:28:17 am Share:
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  • 09/04/2026 10:28:17 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: रामपुर मनिहारान दादी रतन मोहिनी की पावन स्मृति में दिनांक 8 अप्रैल 2026, बुधवार को रामपुर मनिहारान स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय विद्यालय के सेवाकेंद्र पर प्रथम पुण्य स्मृति दिवस अत्यंत श्रद्धा, शांति एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: रामपुर मनिहारान। दादी रतन मोहिनी की पावन स्मृति में दिनांक 8 अप्रैल 2026, बुधवार को रामपुर मनिहारान स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय विद्यालय के सेवाकेंद्र पर प्रथम पुण्य स्मृति दिवस अत्यंत श्रद्धा, शांति एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। इस अवसर पर सेवा केंद्र प्रभारी बीके संतोष बहन एवं बीके कविता दीदी ने अपने संबोधन में बताया कि दादी रतन मोहिनी जी ब्रह्माकुमारीज संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका रही हैं। उनके दिव्य नेतृत्व में संस्था ने आध्यात्मिक उन्नति के नए आयाम स्थापित किए, और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सेवा, त्याग, सादगी एवं मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनके जीवन परिचय में कुछ मुख्य भावनात्मक उद्देश्य उल्लेखनीय  हैं कि दादी रतन मोहिनी जी का जन्म 25 मार्च 1925 को हुआ था। प्रारंभ से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर रहा। उनकी आध्यात्मिक नींव करांची में 14 वर्षों की गहन तपस्या से सुदृढ़ हुई, जहाँ उन्होंने कठोर राजयोग साधना के माध्यम से परमात्मा से गहरा दिव्य संबंध स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं को शिव शक्ति स्वरूप अनुभव किया। यह काल उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय रहा, जिसने उन्हें सेवा और आध्यात्मिक उत्थान के लिए पूर्ण रूप से तैयार किया।

उन्होंने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़कर राजयोग के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया। संस्था में विभिन्न उच्च प्रशासनिक दायित्व निभाते हुए वे अंततः मुख्य प्रशासिका के पद पर आसीन रहीं और देश-विदेश में आध्यात्मिक ज्ञान का व्यापक प्रसार किया। उनके मधुर वचन, सहज व्यक्तित्व एवं अटूट संकल्प ने उन्हें संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया। दिनांक 8 अप्रैल 2025 को उन्होंने अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर परमधाम गमन किया।किंतु उनके द्वारा दिए गए दिव्य संस्कार एवं शिक्षाएं आज भी सभी के जीवन को दिशा प्रदान कर रही हैं। इस कार्यक्रम में सरिता बहन द्वारा राजयोग मेडिटेशन का गहन अभ्यास कराया गया, जिससे उपस्थित सभी भाई-बहनों ने आंतरिक शांति एवं आत्मिक शक्ति का अनुभव किया। इस अवसर पर बीके सुशील भाई, योगराज पंवार, अनूप सिंह, विवेक शर्मा जी, सुरेश पांचाल, राजकुमार जी, सुभाष शर्मा जी, संगीता बहन, जितेंद्र प्रधान जी, कमलेश माताजी एंव सुरेश चौधरी सहित अनेकों भाई-बहन उपस्थित रहे। अंत में सभी ने दादी जी के बताए हुए श्रेष्ठ मार्ग पर चलने एवं समाज में आध्यात्मिकता, शांति एवं सकारात्मकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन शांति  के साथ हुआ।