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उत्तर प्रदेश: जंगल संरक्षण को लेकर आदिवासी समुदाय का विरोध हुआ तेज, बड़े आंदोलन की दी गई चेतावनी
- Photo by : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर विरोध अब खुलकर सामने आने लगा है। जंगल, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर मंगलवार को किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। संगठन ने वन विभाग के अधिकारियों पर वन संरक्षण नियमों की अनदेखी कर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने का आरोप लगाया है। मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने आरोप लगाया कि शासन के निर्देशों और वर्ष 2024 के वन संरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन किए बिना पेड़ों की कटाई के लिए एनओसी जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि संरक्षित पेड़ों को बचाने के बजाय कटान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जंगलों पर निर्भर आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर खतरा पैदा हो सकता है। संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन गांव से निकलकर जिला मुख्यालय, लखनऊ और दिल्ली तक पहुंचाया जाएगा। औद्योगिक परियोजनाओं के विरोध में ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने भी नाराजगी जताई। कन्हैया चेरो ने कहा कि किसी भी कीमत पर क्षेत्र में कंपनी स्थापित नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को बड़े स्तर पर चलाया जाएगा। वहीं बिंदु अग्रहरि ने आरोप लगाया कि कंपनी आने से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा और आदिवासी समुदाय की विरासत तथा प्राकृतिक संसाधनों पर खतरा मंडराने लगेगा। रामसेवक ने कहा कि कोरोना काल में इसी क्षेत्र की स्वच्छ हवा और हरियाली ने लोगों को राहत दी थी, इसलिए आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष शामिल हुए। इस दौरान बिंदु खरवार, गोपीनाथ चेरो, मुखलाल चेरो, गुलाब चेरो, बासमती गोंड़, दिनेश माझी, गुलाब बैगा, राजेश पनिका समेत कई ग्रामीण उपस्थित रहे।