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झारखण्ड: दलित परिवारों की जमीन पर कब्जे करने का लगा आरोप, विधायक ने मांगी निष्पक्ष जांच

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झारखण्ड  Published by: Arun Kumar Ravi , Date: 11/07/2026 01:15:01 pm Share:
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  • 11/07/2026 01:15:01 pm
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झारखण्ड: पलामू में पांकी विधानसभा क्षेत्र के महुगांई गांव में भुइयां समाज दलित परिवारों की खतियानी जमीन पर कथित अवैध कब्जा, फर्जी खरीद-बिक्री और बेदखली के प्रयास का मामला सामने आया है। गुरुवार को दर्जनों ग्रामीणों ने पांकी विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता तथा पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई और न्याय की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी वर्षों पुरानी खतियानी जमीन पर कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करने की कोशिश की है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनकी अशिक्षा और आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराई गई और अब उन्हें उनके ही घरों एवं जमीन से बेदखल करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। 

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उन्हें प्रताड़ित किया गया। विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता ने बताया कि शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय कथित जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया हुई, उस समय दस्तावेज में पहचानकर्ता (गवाह) के रूप में दर्ज व्यक्ति की उम्र महज 13 वर्ष बताई जा रही है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो नाबालिग का गवाह के रूप में शामिल होना गंभीर कानूनी प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, गहन और समयबद्ध जांच कराने की मांग की। 

विधायक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने पलामू के पुलिस अधीक्षक, डीएसपी तथा पांकी थाना पुलिस से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। साथ ही जिला प्रशासन से मांग की है कि शिकायत की जांच पूरी कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि दलित एवं गरीब परिवारों की खतियानी जमीन पर अवैध कब्जा या उन्हें बेघर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो पीड़ित परिवारों को उनकी जमीन वापस दिलाई जाए, अतिक्रमण हटाया जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर अब पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।