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झारखण्ड: विस्थापितों का फूटा गुस्सा, समझौता लागू न होने पर प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप
- Photo by : SOCIAL MEDIA
विस्तार
झारखण्ड: हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित पांडु माइंस परियोजना में विस्थापित परिवारों और मजदूरों ने प्रबंधन पर छह माह पूर्व हुए लिखित समझौते को लागू नहीं करने का आरोप लगाया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि एनटीपीसी की कोयला खनन परियोजना में एमडीओ के रूप में कार्यरत बीजीआर कंपनी ने आंदोलन के दौरान किए गए वादों को अब तक धरातल पर नहीं उतारा, जिससे विस्थापितों में गहरा असंतोष व्याप्त है। स्थानीय मजदूर प्रतिनिधियों के अनुसार पांडु गांव और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने अपनी पुश्तैनी जमीनें परियोजना के लिए उपलब्ध कराईं, लेकिन बदले में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उनका आरोप है कि करीब छह महीने पहले हुए लिखित समझौते के बावजूद अधिकांश मांगों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इससे प्रभावित परिवारों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूर प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे पहले 24 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रबंधन ने कई मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया था। हालांकि उनका दावा है कि समझौते के बाद भी रोजगार, पुनर्वास, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के संबंध में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने पर तो पूरा ध्यान दे रही है, लेकिन जिन लोगों की जमीन पर परियोजना संचालित हो रही है, उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। प्रभावित परिवारों ने श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। साथ ही मजदूरों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा परियोजना विस्तार के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने और स्थानीय स्कूलों के विस्थापन की आशंका भी जताई गई है, जिससे बच्चों के भविष्य पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। मजदूर प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का दबाव बनाकर भय का माहौल तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि विस्थापित परिवार सम्मानजनक रोजगार और समझौते में शामिल सभी बिंदुओं को लागू किए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से अपील की है कि छह महीने पहले हुए समझौते को जल्द से जल्द लागू किया जाए और लंबित मांगों का समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सकारात्मक पहल नहीं हुई तो विस्थापित परिवार अपने अधिकारों के लिए आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
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