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राजस्थान: 150वें लावारिस शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार, मानव कल्याण सेवा समिति ने पेश की मानवता की मिसाल
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: मानव कल्याण सेवा समिति द्वारा एक बार फिर मानवता और सामाजिक सेवा की अनूठी मिसाल पेश करते हुए शनिवार को 150वें लावारिस शव का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ दाह-संस्कार किया गया। समिति के इस पुनीत कार्य की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है।
विस्तार
राजस्थान: मानव कल्याण सेवा समिति द्वारा एक बार फिर मानवता और सामाजिक सेवा की अनूठी मिसाल पेश करते हुए शनिवार को 150वें लावारिस शव का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ दाह-संस्कार किया गया। समिति के इस पुनीत कार्य की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है। संस्था पिछले कई वर्षों से ऐसे असहाय और अज्ञात लोगों के अंतिम संस्कार का दायित्व निभा रही है, जिनका कोई परिजन सामने नहीं आता। जानकारी के अनुसार, भाबरू पुलिस थाने के एएसआई भोलाराम ने बताया कि तीन दिन पूर्व ओल्ड राव होटल के सामने एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में एक अज्ञात व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई। मृतक की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष बताई गई है। उसका शरीर सामान्य कद-काठी का था तथा रंग गेहूंआ था। उसने सुधिया रंग की टी-शर्ट और काले रंग का पायजामा पहन रखा था। उसके सिर पर छोटे-छोटे बाल थे और चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी। पुलिस द्वारा मृतक की पहचान के लिए लगातार प्रयास किए गए। आसपास के क्षेत्रों में सूचना दी गई, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी शिनाख्त कराने का प्रयास किया गया, लेकिन काफी कोशिशों के बावजूद मृतक की पहचान नहीं हो सकी। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने इस संबंध में मानव कल्याण सेवा समिति को सूचना दी। सूचना मिलते ही समिति के सदस्यों ने तुरंत जिम्मेदारी संभाली और भाबरू पुलिस के सहयोग से पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव का अंतिम संस्कार कराया। समिति के कार्यकर्ताओं ने मृतक को अपना मानते हुए सभी संस्कार पूरे विधि-विधान से संपन्न कराए। इस दौरान समिति के कई सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया। समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश स्वामी ने बताया कि संस्था अब तक 150 लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक दाह-संस्कार कर चुकी है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कार्य मानवता को जीवित रखने का संदेश देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दाह-संस्कार के बाद मृतक की अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर मां गंगा में पूरे विधि-विधान से विसर्जित किया जाएगा। समिति का यह कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।
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