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उत्तर प्रदेश: प्राचीन बावड़ी-शिव मंदिर संरक्षण मामले में प्रशासनिक रिपोर्ट से आरोप निराधार साबित हुए 

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उत्तर प्रदेश  Published by: Amarjeet Yadav , Date: 05/06/2026 06:25:28 pm Share:
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  • 05/06/2026 06:25:28 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जमवारामगढ़ ग्राम पंचायत खवारानीजी स्थित प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर के संरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासन द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्टों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जमवारामगढ़ ग्राम पंचायत खवारानीजी स्थित प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर के संरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासन द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्टों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उपखंड अधिकारी जमवारामगढ़, विकास अधिकारी पंचायत समिति जमवारामगढ़ तथा ग्राम पंचायत खवारानीजी की रिपोर्टों में कहा गया है कि उक्त दोनों ऐतिहासिक धरोहरों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा विधिवत जीर्णोद्धार एवं संरक्षण कार्य कराया गया है।महाशक्ति जन कल्याण संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्व में समाचार पत्रों में यह आरोप लगाए गए थे कि संरक्षण कार्य में अनियमितताएं हुई हैं और नियमों की अनदेखी की गई है। इन आरोपों के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच करवाई।

जांच के दौरान राजस्व अभिलेखों, रिकॉर्ड एवं संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि खसरा संख्या 704 में स्थित शिव मंदिर ‘गैर मुमकिन मंदिर’ तथा खसरा संख्या 705 में स्थित प्राचीन बावड़ी ‘गैर मुमकिन बावड़ी’ के रूप में दर्ज है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि कार्यकारी एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ही रही है, जिसने नियमानुसार संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य किया है। प्रशासनिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भूमि खातेदारी श्रेणी की है तथा आवश्यकतानुसार आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया सक्षम विभाग द्वारा नियमानुसार की जाएगी।

महाशक्ति जन कल्याण संगठन ने कहा कि खवारानीजी की बावड़ी एवं शिव मंदिर केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। संगठन ने प्रशासन की जांच रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हुई है और गलतफहमियों का समाधान हुआ है। कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि संगठन भविष्य में भी क्षेत्र की प्राचीन बावड़ियों, मंदिरों एवं अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए कार्य करता रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र के सभी ऐतिहासिक स्थलों का सर्वे कर उन्हें संरक्षण सूची में शामिल किया जाए ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्टों से यह सिद्ध हुआ है कि लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाए गए, जिससे पारदर्शिता और सत्य की स्थिति सामने आई है।