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उत्तर प्रदेश: मोबाइल टॉवर बना शोपीस, बिजली जाते ही ठप हो जाता है नेटवर्क, ग्रामीणों में आक्रोश
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जमानियां ग़ाज़ीपुर ग्रामीण इलाकों में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रहे हैं।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जमानियां ग़ाज़ीपुर ग्रामीण इलाकों में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रहे हैं। जमानियां तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गायघाट गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से निजात दिलाने के लिए लगाया गया नया टॉवर शोपीस बनकर रह गया है। आलम यह है कि जब तक बिजली (सप्लाई) रहती है, तभी तक मोबाइल में नेटवर्क आता है, और बिजली कटते ही स्थिति पहले से भी बदतर हो जाती है। गायघाट गांव में लंबे समय से ग्रामीण नेटवर्क की भारी किल्लत झेल रहे थे। ग्रामीणों की मांग और लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार गांव में एक मोबाइल टॉवर स्थापित किया गया। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें सुचारू नेटवर्क मिलेगा और उनकी परेशानियां दूर होंगी, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। टॉवर चालू तो हुआ, लेकिन उसके संचालन की व्यवस्था आधी-अधूरी छोड़ दी गई। बिजली जाने पर पहले से भी खराब हो जाते हैं हालात: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बिजली की सप्लाई चालू रहती है, तब तक तो मोबाइल में थोड़े-बहुत सिग्नल मिल जाते हैं। लेकिन जैसे ही बिजली कटती है, टॉवर पूरी तरह बंद हो जाता है। टॉवर बंद होने के बाद फोन की स्थिति यह हो जाती है कि सामान्य कॉलिंग होना भी बंद हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, टॉवर लगने के बाद से स्थिति सुधरने के बजाय और खराब हो गई है क्योंकि अब टॉवर के सिग्नलों के उतार-चढ़ाव के कारण फोन पूरी तरह 'नो सर्विस' मोड में चले जाते हैं। गांव के सजग नागरिकों और युवाओं का कहना है कि इस समस्या का एकमात्र समाधान टॉवर परिसर में एक पावर बैकअप (जेनरेटर) की व्यवस्था करना है। अमूमन हर मोबाइल टॉवर के साथ एक जेनरेटर या हैवी बैटरी बैकअप लगाया जाए ताकि बिजली कटौती के दौरान भी नेटवर्क बाधित न हो। लेकिन गायघाट के इस टॉवर में जेनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। "हम प्रशासन और संबंधित टेलीकॉम कंपनी के उच्चाधिकारियों से मांग करते हैं कि गायघाट गांव के इस टॉवर पर जल्द से जल्द जेनरेटर या वैकल्पिक पावर बैकअप की व्यवस्था कराई जाए। डिजिटल युग में नेटवर्क न होना हमारी पढ़ाई, बैंकिंग और रोज़मर्रा के कामों को पूरी तरह ठप कर रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो हम आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।"
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