-
☰
राजस्थान: पर्यावरण प्रहरी विनोद छंगाणी ने पौधारोपण, जल संरक्षण और पक्षी सेवा से पेश की बनी मिसाल
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: फलोदी मरुस्थलीय क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की बात करना जितना आसान है, उसे धरातल पर उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण कार्य है।
विस्तार
राजस्थान: फलोदी मरुस्थलीय क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की बात करना जितना आसान है, उसे धरातल पर उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे समय में फलोदी के पर्यावरण प्रहरी विनोद छंगाणी अपने समर्पण, सेवा और सतत प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण की जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने न केवल सार्वजनिक स्थलों पर सैकड़ों पौधे लगाए, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक नियमित देखभाल कर हरियाली का मजबूत आधार भी तैयार किया है। बढ़ते तापमान, घटते हरित क्षेत्र और जल संकट जैसी चुनौतियों के बीच विनोद छंगाणी पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा लगाए गए अनेक पौधे आज विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं, जो राहगीरों को छाया देने के साथ पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पौधारोपण के बाद उनकी सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण की जिम्मेदारी भी वे स्वयं निभाते हैं, जो उनके समर्पण को दर्शाती है। तालाबों के संरक्षण में भी निभा रहे अहम भूमिका पौधारोपण के साथ-साथ विनोद छंगाणी जल संरक्षण और तालाबों के पुनर्जीवन को लेकर भी सक्रिय हैं। क्षेत्र के ऐतिहासिक तालाबों और जलाशयों की स्वच्छता, संरक्षण तथा जनजागरूकता के लिए वे लगातार प्रयासरत रहते हैं। उनका मानना है कि जल स्रोतों का संरक्षण ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वे समय-समय पर तालाबों की स्थिति का अवलोकन कर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं। उनके प्रयासों से कई सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों को भी प्रेरणा मिली है। पक्षी सेवा को बनाया जीवन का हिस्सा विनोद छंगाणी की पर्यावरण सेवा केवल पौधों और जलाशयों तक सीमित नहीं है। वे नियमित रूप से तालाबों और सार्वजनिक स्थलों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं। भीषण गर्मी के दिनों में उनकी यह सेवा सैकड़ों पक्षियों के लिए जीवनदायिनी साबित होती है। पक्षी संरक्षण के प्रति उनकी संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विनोद छंगाणी ने यह साबित कर दिया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि जनभागीदारी का आंदोलन है। उनके कार्यों से युवाओं और आमजन में पर्यावरण, जल संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है। पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास कुछ पौधों की जिम्मेदारी ले और जल स्रोतों के संरक्षण में सहयोग करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। फलोदी में विनोद छंगाणी द्वारा किया जा रहा यह नि:स्वार्थ सेवा कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
उत्तर प्रदेश: प्राचीन बावड़ी-शिव मंदिर संरक्षण मामले में प्रशासनिक रिपोर्ट से आरोप निराधार साबित हुए
उत्तर प्रदेश: युवतियों की तस्करी गिरोह का हुआ भंडाफोड़, तीन आरोपी हुए गिरफ्तार
मध्य प्रदेश: सदन मराठे बने भाजपा नगर अध्यक्ष, कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
राजस्थान: सिंदूर स्मारक वाटिका में पर्यावरण दिवस पर हुआ वृक्षारोपण, रतनलाल शर्मा ने दिया संदेश
हरियाणा: परिवेदना समिति बैठक में 7 शिकायतों का हुआ मौके पर निपटारा