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गुजरात: मेंटेनेंस नहीं दे सकते तो पत्नी को साथ रखें, सुप्रीम कोर्ट का आया आदेश 

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गुजरात  Published by: Rajput Ranjeet , Date: 05/03/2026 10:45:58 am Share:
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  • 05/03/2026 10:45:58 am
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संक्षेप

गुजरात: एक पति-पत्नी के तलाक का केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। पति ने कोर्ट में बताया कि उसकी सैलरी महज 900 हजार रुपए है और इसलिए वह अपनी पत्नी को तलाक के बाद 12000 हजार रुपये महीने मेंटेनेंस नहीं दे सकता।

विस्तार

गुजरात: एक पति-पत्नी के तलाक का केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। पति ने कोर्ट में बताया कि उसकी सैलरी महज 900 हजार रुपए है और इसलिए वह अपनी पत्नी को तलाक के बाद 12000 हजार रुपये महीने मेंटेनेंस नहीं दे सकता। जानिए इस पर कोर्ट ने क्या-क्या कहा। सुप्रीम कोर्ट में तलाक की सुनवाई हुई। इस केस में पति का कहना है कि वह अपनी पत्नी को हर महीने एलिमनी के तौर पर 12 हजार रुपये नहीं दे सकता। क्योंकि वह दिहाड़ी मजदूर है और उसे हर महीने महज 325 रुपये ही मिलते हैं। उसने कोर्ट को बताया कि वह खूब मेहनत भी करे तो मुश्किल से 9 हजार रुपये महीने ही कमा पाता है। ऐसे में वह पत्नी को 12 हजार रुपये महीने कैसे दे सकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस दावे पर यकीन नहीं किया और कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आज के समय में कोई इतना कम कमाता है। बेंच ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि कोई कंपनी मिनिमम डेली वेज से कम देगी।

 

शख्स ने हिंदुस्तान ऑटो एजेंसी नाम की फर्म को बुलाने की भी इच्छा जताई। कोर्ट ने सवाल किया कि आज कौन सी कंपनी इतनी कम सैलरी देती है। अदालत ने यह भी कहा कि यह बात भरोसेमंद नहीं लगती है। मेंटेनेंस नहीं दे सकते तो पत्नी को साथ रखना चाहिए। शख्स के वकील जॉर्ज पोथन ने अपने क्लाइंट के बयान का बचाव करते हुए कहा कि पति सच-सच अपनी रोज की इनकम बता रहा है और इस बारे में एक एफिडेविट फाइल करने को तैयार है। हालांकि, बेंच ने इस दावे को 'नामुमकिन' बताया और कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पति मेंटेनेंस नहीं दे सकता तो उसे अपनी पत्नी को अपने साथ रखना चाहिए, ताकि वह खाना बना सके और अपने बच्चों और उसका गुजारा कर सके।