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मध्य प्रदेश: बैंकरों की पेंशन फंड कमी पर सवाल, निभाएँ बैंक जिम्मेदारी
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: बैंकिंग क्षेत्र में पेंशन योजना कोई दान या अनुग्रह नहीं है, बल्कि यह सेवा शर्तों का वैधानिक हिस्सा है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: बैंकिंग क्षेत्र में पेंशन योजना कोई दान या अनुग्रह नहीं है, बल्कि यह सेवा शर्तों का वैधानिक हिस्सा है। जब कोई कर्मचारी अपने जीवन के 30–40 वर्ष बैंक को देता है, तो सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक पेंशन उसकी विधिक और नैतिक दोनों प्रकार की हकदारी है। प्रत्येक बैंक की यह वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह अपने पेंशन फंड ट्रस्ट में प्रतिवर्ष एक्चुअरियल वैल्यूएशन (Actuarial Valuation) के अनुसार आवश्यक योगदान जमा करे। यदि फंड में कमी (shortfall) पाई जाती है, तो उसे पूरा करना नियोक्ता (बैंक) का दायित्व है, न कि पेंशनर्स का, लेकिन बार-बार यह कहा जाता है कि “पेंशन अपडेशन संभव नहीं क्योंकि पेंशन फंड में कमी है।” यह तर्क कई प्रश्न खड़े करता है। यदि कमी है, तो उसे वर्षों से क्यों नहीं भरा गया? क्या RBI और नियामकीय संस्थाओं को वास्तविक स्थिति बताई गई। क्या बैंक अपने लाभांश और बोनस में कटौती करते हैं? क्या प्रबंधन ने अपनी जवाबदेही स्वीकार की। सेकंड पेंशन ऑप्शन – 30% बनाम 70% का प्रश्न, सेकंड पेंशन ऑप्शन के समय पेंशनर्स से उनके हिस्से का लगभग 30% योगदान वसूला गया। फंड की कथित कमी का हवाला दिया गया। लेकिन बैंकों का 70% अंशदान — क्या पूर्ण रूप से जमा हुआ।
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