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मध्य प्रदेश: जर्जर सड़क से ग्रामीण हुए परेशान, प्रशासन से लगाई गुहार
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: विकास के बड़े-बड़े दावों और ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की सरकारी योजनाओं के बावजूद छतरपुर प्रखंड के रुदवा गांव स्थित रविदास टोला आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: विकास के बड़े-बड़े दावों और ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की सरकारी योजनाओं के बावजूद छतरपुर प्रखंड के रुदवा गांव स्थित रविदास टोला आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। गांव की यह सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति में है और बरसात शुरू होते ही ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और जलजमाव के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि रविदास टोला की यह सड़क कई वर्षों से जर्जर अवस्था में है। आज तक इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, जबकि इसी रास्ते से पूरे टोले के लोगों का आवागमन होता है। सड़क की खराब स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती, मरीजों का इलाज और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। बरसात के दिनों में यह सड़क किसी तालाब से कम नहीं दिखती, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस सड़क की समस्या को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवेदन देकर अवगत कराया गया। कई बार मौखिक शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। हर चुनाव में सड़क निर्माण का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला जाता है। वर्षों बीत जाने के बावजूद ग्रामीण आज भी उसी जर्जर सड़क पर चलने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। बरसात के दिनों में सड़क पर कीचड़ और पानी भर जाने से कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं। अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। कई बच्चे बारिश के दिनों में स्कूल जाने से भी वंचित रह जाते हैं। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि बाजार, आंगनबाड़ी केंद्र, अस्पताल या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इसी सड़क का उपयोग करना पड़ता है। बरसात के दौरान सड़क की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी कठिन हो जाता है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कत होती है। कई बार एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को खाट या अन्य साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। किसानों ने बताया कि खेती-किसानी के लिए खाद, बीज और कृषि उपकरण लाने-ले जाने में भी भारी परेशानी होती है। फसल तैयार होने के बाद उसे बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च और समय लगता है। सड़क खराब होने के कारण वाहन चालक भी गांव आने से कतराते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसात का पानी जमा रहता है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने से सड़क लगातार कटती जा रही है। यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने की बात करती है, लेकिन रविदास टोला के लोग आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सड़क बन जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार सहित कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, ग्रामीण कार्य विभाग तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस सड़क का जल्द से जल्द सर्वे कराकर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्य चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को विवश होंगे। उनका कहना है कि हम भी इसी देश के नागरिक हैं। हमें भी सम्मानपूर्वक जीने और सुरक्षित आवागमन का अधिकार है। सरकार हमारी वर्षों पुरानी सड़क की समस्या का स्थायी समाधान करे, ताकि रविदास टोला भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।
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